आज की दुनिया में move on करना आसान माना जाता है। लोग जल्दी react करते हैं और उतनी ही जल्दी आगे भी बढ़ जाते हैं। कोई बात हुई, उस पर प्रतिक्रिया आई, और फिर सब खत्म। ऐसा लगता है जैसे रुकना अब ज़रूरी ही नहीं रहा।
लेकिन इसी भीड़ में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो आगे बढ़ने से पहले रुक जाते हैं। जिन्हें शायद एक छोटी-सी बात भी याद रह जाती है। किसी का कहा हुआ एक वाक्य, किसी की आवाज़ का बदला हुआ लहजा, या किसी की अचानक आई चुप्पी। जहाँ बाकी लोग भूल जाते हैं, वहाँ ये लोग याद रख लेते हैं।
बचपन में यही बात उनकी तारीफ़ बनती थी। लोग कहते थे कि इसकी याददाश्त बहुत अच्छी है, यह छोटी-छोटी बातें भी याद रखता है। तब यह एक खूबी थी। स्कूल में, घर में, रिश्तों में — यह संवेदनशीलता सराही जाती थी।
लेकिन जैसे-जैसे दुनिया तेज़ होती गई, वही खूबी धीरे-धीरे सवाल बनने लगी।
आज वही लोग खुद से पूछते हैं कि वे इतनी बातें क्यों याद रखते हैं। वे इतनी जल्दी भूल क्यों नहीं पाते। बाकी लोग इतनी आसानी से move on कैसे कर लेते हैं। और यहीं से अंदर एक confusion शुरू होता है — क्या मुझमें ही कुछ ग़लत है?
असल में यह थकान की कहानी नहीं है। यह पहचान की कहानी है।
कुछ लोग टूटे हुए नहीं होते, वे बस ज़्यादा महसूस करते हैं। जब कोई बात किसी और के लिए हल्की होती है, वही बात उनके लिए थोड़ी भारी हो जाती है। जब कोई मज़ाक बनकर निकल जाता है, वह उनके भीतर कहीं रुक जाता है। वे बातें दिल पर इसलिए नहीं लेते कि वे कमज़ोर हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि उनका मन चीज़ों को गहराई से पकड़ता है।
अक्सर ऐसे लोग खुद को समझाने की कोशिश करते हैं। वे कहते हैं कि अब ज़्यादा सोचना बंद करेंगे, दिल पर लेना छोड़ देंगे, जल्दी आगे बढ़ना सीखेंगे। लेकिन मन कोई स्विच नहीं होता जिसे बंद किया जा सके। जब आपकी प्रकृति ही महसूस करने की है, तो उसे नकारना आसान नहीं होता।
यहीं से यह सवाल उठता है — अगर आप ज़्यादा महसूस करते हैं, तो क्या आप सच में गलत हैं?
या बस इस तेज़ चलती दुनिया के rhythm से थोड़ा अलग हैं?
People Who Feel Too Much इसी पहचान को समझने की एक कोशिश है। यह उन लोगों के बारे में है जो हर बात को सतह पर नहीं छोड़ पाते। जो ज़्यादा सोचते नहीं, बल्कि ज़्यादा महसूस करते हैं। और जो आज की दुनिया में इसी वजह से खुद को confused, अलग या कभी-कभी अकेला महसूस करने लगते हैं।
यह series आपको बदलने की कोशिश नहीं करेगी। यह बस आपको यह समझने में मदद करेगी कि जो आप हैं, वह कैसे बना है।
आगे क्या
अगले भाग में हम बात करेंगे कि ज़्यादा महसूस करने वाले लोग अक्सर ज़्यादा सोचने क्यों लगते हैं,
और यह overthinking धीरे-धीरे कैसे आदत बन जाती है —बिना हमें पता चले।
People Who Feel Too Much – PART 2
यहीं से आगे शुरू होगा।
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कभी-कभी सही शब्द किसी को खुद से जुड़ने में मदद कर देते हैं।
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10 Comments
Facts ❤️
ReplyDeleteGlad you like it! Keep Supporting 😊
Deleteयहीं से यह सवाल उठता है — अगर आप ज़्यादा महसूस करते हैं, तो क्या आप सच में गलत हैं?
ReplyDeleteया बस इस तेज़ चलती दुनिया के rhythm से थोड़ा अलग हैं? Just awesome 👌true fact
Glad you like it! Keep Supporting 😊
ReplyDeleteSo Relatable
ReplyDeleteVery well said 💯
ReplyDeleteGlad you like it! Keep Supporting 😊
DeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteThis piece reflects a depth of emotional intelligence that only lived experience can articulate ✍️✋️
ReplyDeleteGlad you like it! Keep Supporting 😊
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