इस पूरी series में हम एक ही बात के आसपास घूमते रहे हैं — ज़्यादा महसूस करना। कभी यह खूबी लगी, कभी बोझ। कभी पहचान बनी, कभी सवाल। अब यहाँ आकर बात किसी एक भावना की नहीं रहती, बल्कि संतुलन की हो जाती है। सवाल यह नहीं है कि ज़्यादा महसूस करना सही है या गलत। सवाल यह है कि इसके साथ जिया कैसे जाए, बिना खुद को खोए |
ज़्यादा महसूस करने वाले लोग अक्सर मज़बूती को गलत तरह से समझ लेते हैं। उन्हें लगता है कि मज़बूत होने का मतलब है कम महसूस करना, जल्दी भूल जाना, या हर बात को दिल पर न लेना। लेकिन ऐसा करते-करते वे अपनी ही प्रकृति से दूर हो जाते हैं। वे खुद को बदलने की कोशिश करते हैं, और उसी कोशिश में थक जाते हैं।
असल मज़बूती यहाँ से शुरू होती है कि आप यह मान लें — आप जैसे हैं, वैसे ठीक हैं। आपकी संवेदनशीलता कोई कमी नहीं है। यह बस एक तरीका है दुनिया को देखने और समझने का। फर्क तब पड़ता है जब आप यह सीख लेते हैं कि हर भावना उठाना ज़रूरी नहीं है, और हर जिम्मेदारी आपकी नहीं होती।
मज़बूत होना कठोर होना नहीं है। मज़बूत होना यह जानना है कि कब रुकना है, कब पीछे हटना है, और कब खुद को प्राथमिकता देनी है। यह जानना कि care करना और खुद को खो देना एक जैसी बातें नहीं हैं। और यह समझना कि boundaries बनाना रिश्तों से दूर जाना नहीं, बल्कि खुद के पास लौटना है।
इस stage पर कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता। कोई dramatic transformation नहीं होता। बस अंदर एक स्थिरता आने लगती है। आप अभी भी महसूस करते हैं, लेकिन हर बार टूटते नहीं। आप अभी भी समझते हैं, लेकिन हर बार चुप नहीं रहते। आप अभी भी care करते हैं, लेकिन अब खुद को भूलते नहीं।
शायद यही असली closure है।
इस series का मकसद आपको किसी और जैसा बनाना नहीं था। न ही यह सिखाना था कि कैसे कम महसूस किया जाए। इसका मकसद बस इतना था कि जो लोग ज़्यादा महसूस करते हैं, वे खुद को समझ सकें — बिना शर्म के, बिना guilt के।
अगर इस पूरी journey में आपको कहीं लगा कि “यह मेरी ही बात है,” तो शायद आपने अपने आप को थोड़ा और साफ़ देखा है। और कई बार इतना देख लेना ही काफ़ी होता है।
अंत में
अगर यह series आपके साथ कुछ देर रुकी हो, अगर इसने आपको अपने बारे में थोड़ा और सोचने की जगह दी हो, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है।
अगर चाहें तो नीचे comment करके बताइए कि इस journey का कौन-सा हिस्सा आपको सबसे ज़्यादा छू गया।
और अगर आपको लगे कि कोई और भी ऐसा ही महसूस करता है, तो इस series को उसके साथ share करें।
कभी-कभी किसी को यह समझ आ जाना कि वह अकेला नहीं है —यही सबसे बड़ा सहारा बन जाता है।
✍️ लेखक की ओर से
People Who Feel Too Much यहाँ खत्म होती है, लेकिन यह बातचीत यहीं रुकने की ज़रूरत नहीं है।
Ajeebsukun पर आगे भी ऐसी ही शांत, समझने वाली बातें चलती रहेंगी —बिना जल्दबाज़ी, बिना शोर।
#PeopleWhoFeelTooMuch #EmotionalStrength #EmotionalSensitivity #MentalWellbeing #SelfUnderstanding #InnerBalance #PsychologyOfEmotions #EmotionalHealth
0 Comments